भोपाल में करीब 4 महीने बाद गुरुवार को भोपाल जिला पंचायत की मीटिंग हो रही है। बैठक की शुरुआत होते ही सीईओ इला तिवारी ने मीडिया को हॉल से बाहर जाने को कहा। इस पर अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्यों ने आपत्ति ली। कहा कि मीडिया को यही बैठने दिया जाना चाहिए। जनता को पता तो चले कि बैठक में क्या बात हुई है।
मीडिया के प्रति सीईओ के इस रवैया की शिकायत कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह से भी की गई है। इधर, उपाध्यक्ष मोहन सिंह जाट और सदस्य विनय मेहर ने उन अधिकारियों के बारे में जानकारी ली, जिनके जिला अधिकारी बैठक में नहीं पहुंचे थे। उन अधिकारियों को हॉल से बाहर जाने को कहा गया। बैठक में अध्यक्ष रामकुंवर गुर्जर, उपाध्यक्ष जाट, सदस्य मेहर, विक्रम भालेराव, रश्मि भार्गव, बिजिया राजोरिया, चंद्रेश राजपूत, गंगाबाई मालवीय, रामकुंवर हाड़ा, जनपद अध्यक्ष प्रमोद सिंह राजपूत, विधायक प्रतिनिधि दीपक गुर्जर, सीईओ तिवारी समेत अन्य अधिकारी मौजूद हैं।
बैठक में उपाध्यक्ष जाट ने गांवों में पानी की कमी का मुद्दा उठाया। पीएचई के इंजीनियर संजय सक्सेना पर जमकर नाराजगी जाहिर की गई। गांव में पानी, सड़क को लेकर सदस्य मेहर, जनपद पंचायत अध्यक्ष प्रमोद सिंह राजपूत में भी विरोध जताया। कहा कि अधिकारी सुनते नहीं है। हर बार ऐसा ही रवैया रहा है। ऐसा ही रहा तो भूख हड़ताल पर बैठ जाएंगे।
सदस्य विक्रम भालेराव के काम नहीं होने पर आपत्ति जताई और संबंधित अधिकारी पर नाराजगी जाहिर की।
बैठक में स्वास्थ्य, शिक्षा, पीएचई, कृषि, पीडब्ल्यूडी, आदिम जाति, वन, महिला और बाल विकास समेत 15 विभाग के कामों की समीक्षा हो रही है। इससे पहले सामान्य प्रशासन समिति की मीटिंग भी हुई, जिसमें प्रतिनिधियों को एंट्री नहीं दी गई।
आज दो मीटिंग दोपहर 12 बजे सामान्य प्रशासन समिति की बैठक हुई। जिसमें अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सभापति ही मौजूद रहे। दोपहर 1.30 बजे से साधारण सभा की बैठक शुरू हो गई। इन दोनों ही बैठकों में प्रतिनिधि शामिल नहीं हो रहे हैं।
इसलिए जरूरी है मीटिंग जानकारी के अनुसार, मीटिंग ही एक ऐसा प्लेटफार्म होता है, जब सभी विभागों के अफसरों से जिपं अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्य रूबरू होते हैं।
गांव से जुड़े मुद्दे रहेंगे बैठक में गांव से जुड़े मुद्दे उठाए जाएंगे। खासकर स्कूलों में शिक्षकों की पदस्थापना, जर्जर सड़कें, बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्थाएं, मनरेगा, मध्याह्न भोजन आदि शामिल हैं।
दो महीने में होनी चाहिए मीटिंग नियमानुसार मीटिंग हर दो महीने में होनी चाहिए। हालांकि, तत्कालीन सीईओ ऋतुराज सिंह के तबादले और भोपाल में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट की वजह से बैठक में देरी हुई। पिछली मीटिंग 9 नवंबर 2024 को हुई थी। जिसमें सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य को लेकर सदस्यों ने कई सवाल उठाए थे।
पिछली बैठकों में उपाध्यक्ष और सदस्यों की अधिकारियों पर भड़ास भी निकली थी। इसके बाद कामों में थोड़ी तेजी आई।
निगम की बैठक नहीं होने से कांग्रेस पार्षद नाराज दूसरी ओर, नगर निगम की बैठक नहीं होने से कांग्रेस पार्षद नाराज है। इसे लेकर वो भोपाल कमिश्नर संजीव सिंह से मुलाकात भी कर चुके हैं। जिसमें कहा गया है कि पिछली बैठक 13 दिसंबर 2024 को हुई थी, जिसे तीन महीने से ज्यादा का समय बीत चुका है, जबकि हर दो महीने में बैठक होना चाहिए।
अब तक एजेंडा भी जारी नहीं किया गया है, जो नगर पालिक निगम विधि संहिता धारा 18 और 23क का उल्लंघन है। हालांकि, अब बैठक 3 अप्रैल को होना सामने आया है।