बिजनेस डेस्क। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देशवासियों से अपील की है कि लोग अगले एक साल तक सोने की खरीदारी से बचें। उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक हालात और विदेशी मुद्रा बचाने की जरूरत को देखते हुए यह देशहित में जरूरी कदम हो सकता है। हैदराबाद में एक रैली को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि पहले संकट के समय लोग देश के लिए सोना दान करते थे, लेकिन आज जरूरत दान की नहीं बल्कि संयम की है। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे शादी, समारोह या अन्य कार्यक्रमों में भी सोने के गहने खरीदने से बचें ताकि देश की विदेशी मुद्रा बचाई जा सके।
इन 3 वजह से पीएम ने की सोना खरीदने से बचने की अपील
1 भारत की सोने के आयात पर भारी निर्भरता
भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना आयात करने वाले देशों में शामिल है। हर साल देश में भारी मात्रा में सोना विदेशों से खरीदा जाता है। 2021 में भारत ने 1,067 टन से ज्यादा सोने का आयात किया था। यहां तक कि जिन वर्षों में आयात कम रहा, तब भी यह आंकड़ा 430 टन से ऊपर ही रहा। लंबे समय का औसत देखें तो भारत हर साल करीब 800 टन सोना आयात करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे विदेशी मुद्रा भंडार और चालू खाता संतुलन पर बड़ा दबाव पड़ता है। भारत पहले से ही कच्चे तेल, खाद्य तेल, इलेक्ट्रॉनिक्स और फर्टिलाइज़र जैसी जरूरी चीजों के आयात पर निर्भर है। ऐसे में सोने जैसे गैर-जरूरी आयात विदेशी मुद्रा पर अतिरिक्त बोझ बढ़ाते हैं।
2 मध्य-पूर्व तनाव और विदेशी मुद्रा भंडार पर बढ़ा दबाव
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री की यह अपील भारत की बाहरी आर्थिक स्थिति को लेकर बढ़ती चिंता का संकेत है। केडिया कमोडिटी के डायरेक्टर अजय केडिया के अनुसार, मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और लगातार बढ़ते आयात बिल ने भारत की आर्थिक स्थिति पर दबाव बढ़ा दिया है। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में भारतीय रुपया तेजी से कमजोर हुआ है। वर्ष 2021 में डॉलर के मुकाबले रुपया करीब 74-75 के स्तर पर था, जबकि 2026 तक यह 95 रुपये प्रति डॉलर से नीचे पहुंच गया। इसका मतलब है कि रुपये की कीमत में लगभग 27-28 प्रतिशत की गिरावट आई है।
3 रुपये की कमजोरी से बढ़ रही मुश्किल?
अजय केडिया के मुताबिक, विदेशी मुद्रा भंडार में उतार-चढ़ाव और आयात की बढ़ती लागत के कारण रुपये पर दबाव लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि 6 मार्च 2026 को भारत का विदेशी मुद्रा भंडार करीब 728.49 अरब डॉलर तक पहुंच गया था, लेकिन बाद में यह घटकर लगभग 690.69 अरब डॉलर के आसपास आ गया। कमजोर रुपया आयातित वस्तुओं को और महंगा बना देता है। खासकर कच्चा तेल और सोना जैसे उत्पादों की कीमतें सीधे प्रभावित होती हैं, जिससे देश की बाहरी आर्थिक स्थिति और कमजोर हो सकती है।