अमेरिका-ईरान के टकराव में पाकिस्तान का 'डबल गेम

Updated on 12-05-2026 12:20 PM

पश्चिम एशिया में बारूद की गंध और आसमान में मंडराते युद्ध के बादलों के बीच एक ऐसी रिपोर्ट सामने आई है, जिसने वैश्विक कूटनीति में भूचाल ला दिया है। एक तरफ पाकिस्तान खुद को अमेरिका और ईरान के बीच 'शांतिदूत' के रूप में पेश कर रहा था, वहीं दूसरी ओर पर्दे के पीछे वह ईरान के सैन्य संसाधनों को अमेरिकी मिसाइलों से बचाने की गुप्त योजना पर काम कर रहा था। अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से आई एक रिपोर्ट ने दावा किया है कि पाकिस्तान ने अपने रणनीतिक एयरबेस का इस्तेमाल ईरानी सैन्य विमानों को 'सुरक्षित पनाहगाह' देने के लिए किया।

सस्पेंस तब शुरू हुआ जब CBS News की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अप्रैल में सीज़फ़ायर की घोषणा के तुरंत बाद, ईरान ने अपनी वायुसेना की बची-कुची ताकत को बचाने के लिए एक 'सीक्रेट ऑपरेशन' चलाया। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने अपने कई मिलिट्री विमानों को रावलपिंडी स्थित पाकिस्तान एयर फ़ोर्स के नूर खान बेस पर भेज दिया। इन विमानों में सबसे अहम RC-130 था—जो एक टोही और जासूसी विमान है। सवाल यह उठता है कि क्या पाकिस्तान ने जानबूझकर अमेरिका की आंखों में धूल झोंकी?


नूर खान एयरबेस रावलपिंडी के व्यस्त इलाके में और पाकिस्तान के सैन्य मुख्यालय (GHQ) के बिल्कुल करीब स्थित है। पाकिस्तान ने इन आरोपों को यह कहकर खारिज कर दिया कि इतने बड़े विमानों के बेड़े को शहर के बीचों-बीच छिपाना नामुमकिन है। लेकिन अमेरिकी खुफिया तंत्र का दावा है कि यह ईरान की अपनी संपत्तियों को बचाने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा था। इसी दौरान, ईरान के नागरिक विमानों ने अफगानिस्तान के काबुल में शरण ली, जिससे इस पूरे घटनाक्रम में तालिबान का एंगल भी जुड़ गया है।


इस खुलासे के बाद अमेरिका में राजनीतिक पारा चढ़ गया है। रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने सोशल मीडिया पर पाकिस्तान की भूमिका पर कड़े सवाल उठाए हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि ये दावे सच हैं, तो अमेरिका को पाकिस्तान के साथ अपने कूटनीतिक रिश्तों का "पूरी तरह से पुनर्मूल्यांकन" करना होगा। अमेरिका के लिए यह खबर किसी बड़े धोखे से कम नहीं है, क्योंकि वह पाकिस्तान को क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के लिए एक अहम सहयोगी मानता रहा है।यह पूरा विवाद तब चरम पर पहुंचा है जब ईरान ने अमेरिका समर्थित शांति प्रस्ताव को 'अस्वीकार्य' बताते हुए ठुकरा दिया और मुआवजे की मांग कर दी। ट्रंप प्रशासन ने ईरान के इस रुख पर सख्त नाराजगी जताई है। पाकिस्तान, जो एक तरफ चीन के साथ अपने रणनीतिक रिश्तों को सहेज रहा है और दूसरी तरफ अमेरिका के साथ संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है, अब एक बेहद मुश्किल मोड़ पर खड़ा है।



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