ज्ञान भारतम् राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण में अब तक 1 करोड़ 22 लाख पांडुलिपियों हुई वेरिफाई

Updated on 04-08-2026 05:05 PM
ज्ञान भारतम् राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण में अब तक 1 करोड़ 22 लाख पांडुलिपियों हुई वेरिफाई,  मध्यप्रदेश देश में प्रथम


संस्कृति मंत्रालय द्वारा नेशनल डिजिटाइजेशन ड्राइव पर राजधानी दिल्ली में कार्यशाला आयोजित की गयी। राज्य और केंद्र शासित प्रदेश ज्ञान भारतम् राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण में बढ़ चढ़ कर भाग ले रहे हैं और इसके द्वारा अब तक 1 करोड़ 22 लाख पांडुलिपियां चिह्नित की जा चुकी हैं।संस्कृति मंत्रालय द्वारा आयोजित नेशनल डिजिटाइजेशन ड्राइव  कार्यशाला में संस्कृति सचिव विवेक अग्रवाल जी ने ज्ञान भारतम् राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण के बारे में बताते हुए कहा कि इस सर्वेक्षण में सभी कार्य पूरी पारदर्शिता से किये गये और राज्यों से आयी सभी जानकारी को पोर्टल पर उपलब्ध कराया गया। 1 करोड़ 22 लाख पांडुलिपियों को वेरिफाई कर पोर्टल पर अपडेट कर दिया गया है। ये वो पांडुलिपियों हैं भारत में मिली हैं। इसके अलावा विश्व में बिखरी हुई धरोहरों को संजोने के लिये भी प्रयास जारी हैं।


दुर्लभ प्राचीन पांडुलिपियों को सहेजने और संरक्षित करने में मध्यप्रदेश देश में प्रथम

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के सांस्कृतिक अभ्युदय के संकल्प को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सशक्त नेतृत्व में साकार किया जा रहा है। मध्यप्रदेश की धरती ने भारत की प्राचीन ज्ञान-संपदा और सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने के विषय में देश भर में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। भारत सरकार की डिजिटल पहल 'ज्ञान भारतम् ऐप' के अनुसार, दुर्लभ प्राचीन पांडुलिपियों की सूचना दर्ज करने और उनके संरक्षण के मामले में मध्यप्रदेश पूरे देश में प्रथम स्थान पर आ गया है। यह सफलता राज्य की समृद्ध ऐतिहासिक और बौद्धिक विरासत को वैश्विक पटल पर पुनः स्थापित करने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो रही है। अब तक उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के अनुसार, ज्ञान भारतम् ऐप के माध्यम से 3 जुलाई 2026 को मध्यप्रदेश ने अब तक कुल 34 लाख 45 हजार 439 पांडुलिपियों पन्नों का पंजीकरण किया जा चुका है। 12 लाख 13 हजार 127 पांडुलिपियों का 'ज्ञान भारतम्' द्वारा सफलतापूर्वक सत्यापन हुआ है शेष सत्यापन की प्रक्रिया में हैं, जिनका चरणबद्ध तरीके से परीक्षण एवं प्रमाणीकरण किया जा रहा है।

प्रदेश में पांडुलिपियों के पंजीकरण के लिए विशेष अभियान

ज्ञान भारतम् अभियान के अंतर्गत पांडुलिपियों के पंजीकरण में मध्यप्रदेश के सभी जिलों में विशेष अभियान चलाया जा रहा है। 1 जुलाई तक के आकंड़ों के अनुसार इनमें भोपाल ने सबसे अधिक 24 लाख 26, हजार 172 पांडुलिपियों का पंजीकरण किया है। इसके बाद इंदौर में 3,99,477, रीवा में 2,68,763, बैतूल में 1,00,593 तथा छिंदवाड़ा में 77,094 पांडुलिपियां दर्ज की गईं। पन्ना से 64,257, सागर से 60,025, ग्वालियर से 29,870, उज्जैन से 20,995, रायसेन से 15,539, मंदसौर से 12,412, अनूपपुर से 11,829, नीमच से 8,950, मऊगंज से 8,406, खंडवा से 5,740, जबलपुर से 4,715, सतना से 4,061, नर्मदापुरम (होशंगाबाद) से 4,049, गुना से 3,937, उमरिया से 3,824, दतिया से 3,179, विदिशा से 2,745, सीधी से 2,497, अशोकनगर से 1,908, बालाघाट से 1,741, शहडोल से 1,397, टीकमगढ़ से 1,290, मंडला से 957, शिवपुरी से 943, धार से 870, भिंड से 800, रतलाम से 731, मुरैना से 655, शाजापुर से 638, बड़वानी से 614, सीहोर से 607, सिवनी से 564, छतरपुर से 381, देवास से 330, श्योपुर से 310, नरसिंहपुर से 254, राजगढ़ से 198, निवाड़ी से 177, खरगोन से 171, मैहर से 146, दमोह से 133, बुरहानपुर से 120, हरदा से 84, कटनी से 83, आगर मालवा से 57, सिंगरौली से 33, झाबुआ से 17, अलीराजपुर से 8, पांढुर्ना से 3 तथा डिंडोरी से 1 पांडुलिपि का पंजीकरण किया गया। यह व्यापक सहभागिता दर्शाती है कि प्रदेश के सभी जिलों ने भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा, सांस्कृतिक विरासत और पांडुलिपि धरोहर के संरक्षण एवं दस्तावेजीकरण के राष्ट्रीय अभियान में अपनी सक्रिय और महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

'ज्ञान भारतम् ऐप' और इसका उद्देश्य

'ज्ञान भारतम् ऐप' भारत सरकार की एक अनूठी डिजिटल पहल है, जिसका मुख्य उद्देश्य भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा को सुरक्षित रखना और दुर्लभ पांडुलिपियों का एक विशाल डिजिटल अभिलेख (Digital Archive) तैयार करना है। ये भारतीय पांडुलिपियाँ केवल अतीत की स्मृतियाँ नहीं हैं, बल्कि 'वसुधैव कुटुम्बकम्' (विश्व एक परिवार है) की भावना से प्रेरित ज्ञान, संस्कृति और जीवन मूल्यों का जीवंत स्रोत हैं, जो संपूर्ण मानवता के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करती हैं। इस डिजिटल अभियान के माध्यम से शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों और आम नागरिकों के लिए इन अमूल्य ग्रंथों तक पहुँच बेहद आसान हो गई है।

पांडुलिपियों के संरक्षण और डिजिटलीकरण में नागरिक भी बन सकते हैं भागीदार

ज्ञान भारतम् ऐप न केवल सूचना देता है, बल्कि आम जनता को भी इस सांस्कृतिक महायज्ञ से जोड़ता है। स्मार्ट सर्च: उपयोगकर्ता शीर्षक, लेखक, भाषा, विषय और संग्रह स्थल के आधार पर किसी भी पांडुलिपि की जानकारी आसानी से खोज सकते हैं। यदि किसी व्यक्ति या संस्था के पास कोई दुर्लभ पांडुलिपि उपलब्ध है, तो वे ऐप के माध्यम से उसके संरक्षण या डिजिटलीकरण के लिए सीधे अनुरोध दर्ज कर सकते हैं। आम नागरिक अपने पास मौजूद प्राचीन हस्तलिखित ग्रंथों की जानकारी साझा कर भारत को पुनः 'विश्व गुरु' के रूप में स्थापित करने में अपना योगदान दे सकते हैं।

जिलों से मिलीं दुर्लभ प्राचीन पांडुलिपियाँ

ज्ञान भारतम् मिशन से हुए संरक्षण कार्य से कई प्राचीन हस्तलिखित पांडुलिपियों का पता चला है। टीकमगढ़ से 10 फीट लंबा जम्बूद्वीप का रहस्यमयी नक्शा मिला है। इसमें प्राचीन भारतीय भूगोल को दर्शाने वाला 'जम्बूद्वीप' का एक अत्यंत रहस्यमयी और दुर्लभ नक्शा अंकित है।चित्र में बीच में वृत्ताकार संरचना है, उसके चारों ओर पर्वत-मालाएं और क्षेत्र दिखाए गए हैं।

इसी तरह पन्ना से महाकवि केशव दास रचित रसिक प्रिया(1591 ई) की हस्त लिखित पांडुलिपि श्री राम जानकी मंदिर में मिली है। यह रीतिकाल का एक प्रतिष्ठित 'लक्षण-ग्रंथ' है जो काव्यशास्त्र, श्रृंगार रस और नायिका-भेद पर आधारित है। इसमें अमूर्त शास्त्रीय नियमों को राधा-कृष्ण के प्रेम प्रसंगों और मौलिक छंदों के माध्यम से समझाया गया है।

बुरहानपुर से 220 वर्ष पुराना हस्तलिखित 20 फीट लंबा प्राचीन 'श्रीमद्भागवत महापुराण' ग्रंथ भी शामिल है, जिसका आधिकारिक तौर पर पंजीयन कर लिया गया है। दतिया के श्री राधा वल्लभ मिश्रा के आवास से ओरछा नरेश राजा उद्दोत सिंह के समय का एक ताम्रपत्र अभिलेख प्राप्त हुआ है, जिस पर विक्रम संवत 1828 अंकित है।

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