खाद के संतुलित उपयोग, किसान आईडी और नई तकनीक पर जोर, खेत बचाओ अभियान चलेगा

Updated on 20-05-2026 02:12 PM

भुवनेश्वर/नई दिल्ली, 19 मई 2026, भुवनेश्वर में आयोजित पूर्वी क्षेत्रीय खरीफ कृषि जोनल कॉन्फ्रेंस के दौरान केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि पूर्वी भारत की कृषि को नई ऊंचाई देने के लिए केंद्र और राज्यों के बीच विषय-विशेष, क्षेत्र-विशेष और राज्य-विशेष रोडमैप के साथ आगे बढ़ना जरूरी है। उन्होंने कहा कि ओडिशा, बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड और पश्चिम बंगाल को शामिल करने वाली यह जोनल कॉन्फ्रेंस खाद्य सुरक्षा, पोषण, किसान आय, फसल विविधीकरण, इंटीग्रेटेड फार्मिंग, संतुलित उर्वरक उपयोग, फार्मर आईडी, दलहन-तिलहन, प्राकृतिक खेती, हॉर्टिकल्चर और कृषि अवसंरचना जैसे विषयों पर विस्तृत और सार्थक चर्चा का मंच बनी। 

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मीडिया से चर्चा में कहा कि देश बड़ा है, कृषि-जलवायु परिस्थितियां अलग-अलग हैं, मिट्टी की प्रकृति अलग है और राज्यों की चुनौतियां भी भिन्न हैं, इसलिए अब एक ही राष्ट्रीय सम्मेलन के बजाय जोनल कॉन्फ्रेंस की व्यवस्था अधिक प्रभावी साबित हो रही है। उन्होंने बताया कि यह तीसरी जोनल कॉन्फ्रेंस है और इसमें ओडिशा, बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड तथा पश्चिम बंगाल शामिल हैं, ताकि पूर्वी भारत की जरूरतों के अनुरूप विस्तार से चर्चा कर ठोस निर्णय लिए जा सकें। 

श्री चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत सरकार के कृषि के संबंध में तीन उद्देश्य स्पष्ट है- देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना, केवल अनाज ही नहीं बल्कि पोषण की उपलब्धता भी बढ़ाना और किसानों की आय तथा आजीविका को मजबूत करना। उन्होंने कहा कि इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने छह सूत्रीय रणनीति पर काम आगे बढ़ाया है, जिसमें उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाना, लागत घटाना, किसान को उचित मूल्य दिलाना, नुकसान की स्थिति में भरपाई की व्यवस्था करना और कृषि का विविधीकरण प्रमुख हैं। 

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि देश आज धान और गेहूं के उत्पादन में मजबूत स्थिति में है, लेकिन दलहन और तिलहन के क्षेत्र में अभी आत्मनिर्भरता हासिल करना बाकी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विविधीकरण का अर्थ केवल दूसरी फसलों का विस्तार नहीं, बल्कि मिट्टी के स्वास्थ्य की रक्षा भी है, क्योंकि एक ही फसल बार-बार लगाने से भूमि की सेहत प्रभावित होती है, जबकि दलहनी फसलें नाइट्रोजन स्थिरीकरण के माध्यम से मिट्टी को भी लाभ पहुंचाती हैं। 

श्री चौहान ने कहा कि छोटे और सीमांत किसानों की वास्तविक जरूरतों को देखते हुए इंटीग्रेटेड फार्मिंग पर विशेष बल दिया गया है। उन्होंने बताया कि छोटे किसानों के लिए ऐसे मॉडल विकसित किए गए हैं, जिनमें अनाज के साथ फल, सब्जियां, पशुपालन, मछली पालन, मधुमक्खी पालन और एग्रो फॉरेस्ट्री को जोड़कर आय के अनेक स्रोत तैयार किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि पूर्वी भारत के राज्यों में इंटीग्रेटेड फार्मिंग को लोकप्रिय बनाकर किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है। 

प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने कृषि ऋण और किसान क्रेडिट का उल्लेख करते हुए कहा कि कई राज्यों और जिलों में कृषि ऋण का प्रवाह अभी भी पर्याप्त नहीं है, जबकि आधुनिक तकनीक, बागवानी, हॉर्टिकल्चर और इंटीग्रेटेड फार्मिंग के विस्तार के लिए पूंजी की जरूरत पड़ेगी। उन्होंने कहा कि राज्यों के अनुरूप मॉडल तैयार कर इस दिशा में काम किया जाएगा, ताकि किसानों तक अधिक प्रभावी ढंग से ऋण पहुंच सके। 

श्री चौहान ने बताया कि 1 जून से 15 जून तक पूरे देश में “खेत बचाओ अभियान” चलाया जाएगा, जिसमें संतुलित उर्वरक उपयोग, मिट्टी की सेहत और किसानों को शिक्षित करने पर जोर रहेगा। उन्होंने कहा कि बिना मृदा स्थिति समझे अत्यधिक खाद डालने से लागत भी बढ़ती है और मिट्टी, फसल तथा मानव स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, इसलिए जरूरी है कि किसान आवश्यकतानुसार ही उर्वरक का उपयोग करें। 

उन्होंने फार्मर आईडी को किसानों के लिए परिवर्तनकारी पहल बताते हुए कहा कि इससे किसान की जमीन, फसल, परिवार और अन्य विवरण एकीकृत रूप में उपलब्ध रहेंगे। श्री चौहान ने कहा कि फार्मर आईडी के माध्यम से ऋण, डीबीटी, योजनाओं का लाभ और खाद वितरण को अधिक पारदर्शी, त्वरित और लक्षित बनाया जा सकेगा, साथ ही सब्सिडी वाले उर्वरकों के डायवर्जन पर भी प्रभावी नियंत्रण संभव होगा। उन्होंने कहा कि जिन राज्यों में यह काम तेजी से चल रहा है, वहां प्रगति उत्साहजनक है, और जहां शुरुआत नहीं हुई है, वहां भी इसे आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। 

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि पूर्वी भारत में धान कटाई के बाद खाली रहने वाली राइस फेलो भूमि दलहन और तिलहन मिशन के लिए बड़ी संभावना प्रस्तुत करती है। उन्होंने बताया कि इन क्षेत्रों की पहचान कर दलहन के अच्छे बीज, डेमोंस्ट्रेशन, किसानों को प्रोत्साहन और पीएम-आशा के तहत खरीद व्यवस्था को मजबूत करने का प्रयास किया जाएगा, ताकि उड़द, मसूर, तुअर जैसी फसलों का उत्पादन बढ़ सके। उन्होंने यह भी कहा कि दाल मिल और तेल मिलों की स्थापना को बढ़ावा देने के लिए सब्सिडी प्रदान की जाएगी, ताकि उत्पादन के साथ स्थानीय स्तर पर प्रोसेसिंग और मूल्य संवर्धन भी हो सके। 

श्री चौहान ने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने, नकली पेस्टिसाइड और घटिया उर्वरकों के खिलाफ व्यापक अभियान चलाने और सख्त कानून लाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि मौजूदा दंडात्मक प्रावधान अपर्याप्त हैं, इसलिए नया पेस्टिसाइड एक्ट और नया सीड एक्ट लाने की तैयारी की जा रही है, जिससे दोषी तत्वों के खिलाफ कड़ी सजा सुनिश्चित की जा सके और किसानों को गुणवत्तापूर्ण कृषि आदान उपलब्ध हों। 

उन्होंने कहा कि पूर्वी राज्यों में हॉर्टिकल्चर की अपार संभावनाएं हैं और आम जैसी फसलों से लेकर अन्य बागवानी उत्पादों तक किसानों की आय बढ़ाने की बड़ी क्षमता मौजूद है। श्री चौहान ने बताया कि फसलवार और राज्यवार कृषि रोडमैप तैयार किया जाएगा, जिसमें मिट्टी, जलवायु, उपलब्ध संसाधन और स्थानीय उपयुक्तता के आधार पर अधिकतम उत्पादन तथा बेहतर प्रबंधन की दिशा तय की जाएगी। 

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने कोल्ड स्टोरेज और कोल्ड चेन इंफ्रा की जरूरत को स्वीकार करते हुए कहा कि इस क्षेत्र में और तेजी से काम करने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि एमआईडीएच, एग्रीकल्चर इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड और किसान संपदा जैसी योजनाओं के माध्यम से कोल्ड स्टोरेज निर्माण और कृषि अवसंरचना को मजबूती देने का प्रयास जारी है और पूर्वी भारत में इन सुविधाओं का विस्तार किसानों के हित में महत्वपूर्ण होगा। 

श्री चौहान ने कहा कि भारत सरकार के पास बड़ी संख्या में कृषि वैज्ञानिक हैं और राज्यों के साथ समन्वय कर वैज्ञानिकों, विश्वविद्यालयों और केवीके के माध्यम से नई तकनीक, शोध, सर्वोत्तम प्रथाएं और उपयोगी जानकारी किसानों तक पहुंचाने का काम आगे भी जारी रहेगा। 

उन्होंने कहा कि खेती भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और किसान की जिंदगी, आजीविका तथा उत्पादन क्षमता को बेहतर बनाना ही सरकार का मूल प्रयत्न है। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि खेती और किसान के सामने मौजूद हर चुनौती का समाधान निकाला जाए, उत्पादन बढ़े, लागत घटे, मिट्टी बचे, विविधीकरण को गति मिले और किसानों की जिंदगी अधिक समृद्ध, सुरक्षित और सम्मानजनक बने।

अन्य महत्वपुर्ण खबरें

 21 July 2026
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के सांस्कृतिक अभ्युदय और भारत की गौरवशाली विरासत के पुनर्जागरण के संकल्प को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश प्रभावी रूप से साकार कर…
 15 July 2026
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मंत्रि-परिषद की आगामी बैठक 18 जुलाई, शनिवार को भोपाल जिले के जगदीशपुर (पूर्व के इस्लाम नगर) में होगी। इसमें मुख्य रूप से…
 10 July 2026
पवित्र नगरी ओंकारेश्वर में 'एकात्म धाम' में स्थापित आदिगुरु शंकराचार्य की 108 फीट ऊँची बहुधातु प्रतिमा—'एकात्मता की मूर्ति' पूर्णतः सुरक्षित, सुदृढ़ और संरचनात्मक रूप से अत्यंत मजबूत है। संस्कृति विभाग…
 03 July 2026
प्राकृतिक सौंदर्य, हरियाली और शांत वातावरण के लिए प्रसिद्ध, बैतूल जिले की भैंसदेही तहसील में स्थित कुकरू एक अनछुआ रमणीय पर्यटन स्थल है। समुद्र तल से लगभग 3,668 फीट की…
 02 July 2026
औरंगाबाद: बिहार के औरंगाबाद जिले में गुरुवार सुबह एक सड़क हादसे ने दो परिवारों की खुशियां हमेशा के लिए छीन लीं। पौथू थाना क्षेत्र के भतारी गांव के समीप कोचिंग…
 02 July 2026
 हमीरपुरः यूपी के हमीरपुर में बहू से परेशान 75 साल के संत ने अपने पेट में छुरी घुसेड़ ली। यह दृश्य देखकर मासूम नातिन बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़ी।…
 02 July 2026
जयपुर: राजस्थान में भीषण गर्मी और उमस मौसम से अब जल्द ही राहत मिलने वाली है। लगभग एक हफ्ते की देरी के बाद, दक्षिण-पश्चिमी मानसून अगले 24 से 30 घंटों…
 02 July 2026
 मथुरा: यूपी के मथुरा में पुलिस ने नशे के सौदागरों के खिलाफ बड़ी कामयाबी हासिल की है। पुलिस ने एक बंद दुकान पर छापा मारकर भारी मात्रा में अवैध गांजा…
 02 July 2026
नई दिल्ली/कोलकाता, तृणमूल कांग्रेस (TMC) का बागी गुट आज दोपहर 12 बजे नई दिल्ली में चुनाव आयोग से मिलेगा। 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल पार्टी में हुए संगठनात्मक बदलावों और नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी…
Advt.