नवी मुंबई के सावली में देश की पहली समुद्री रेल सुरंग बनाई जा रही है। इस सुरंग से देश की पहली बुलेट ट्रेन गुजरेगी।

सुरंग बनाने का काम जमीन से 114 मीटर नीचे चल रहा है, यानी इतनी गहराई, जितनी 35 मंजिला ऊंची इमारत होती है।

समुद्र के अंदर सुरंग बनाने का यह छठा प्रोजेक्ट है। दुनिया में सबसे ज्यादा 2 समुद्री सुरंगें जापान में हैं। इसके अलावा चीन, नॉर्वे में एक-एक समुद्री सुरंग है। ब्रिटेन और फ्रांस के बीच भी एक समुद्री सुरंग बनी है।


1,200 मजदूर, 3,000 टन भारी मशीन, दिन-रात काम जारी

भारी गर्मी और घुटन के बीच करीब 1,200 मजदूर और इंजीनियर दिन-रात इस काम में जुटे हैं। सावली से शीलफाटा के बीच 4.8 किलोमीटर लंबी सुरंग पहले ही तैयार हो चुकी है। अब समुद्र के अंदर 7 किलोमीटर लंबी सुरंग खोदी जा रही है, जिसके लिए 3,000 टन भारी मशीन लगातार खुदाई कर रही है।

आमतौर पर मेट्रो के आने-जाने के लिए दो अलग सुरंगे बनती हैं, लेकिन यहां एक ही चौड़ी सुरंग के अंदर से दोनों तरफ की बुलेट ट्रेनें एक साथ निकलेंगी। समुद्र के नीचे ट्रेन की रफ्तार 180 से 280 किलोमीटर प्रति घंटा रहेगी, जबकि बाहर आते ही यह 320 किलोमीटर प्रति घंटे की टॉप स्पीड पकड़ेगी।


चीन से इसी साल मार्च में मिली टीबीएम

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन की 21 किमी लंबी टनल का सबसे अहम हिस्सा सावली से विक्रोली (9.7 किमी) है। समुद्री टनल इसी का मुख्य भाग है। इसमें 7 किलोमीटर का हिस्सा पूरी तरह पानी की ऊपरी लेयर से 5 से 8 मीटर तक नीचे होगा।

यहां अभी 10% काम हो चुका है। काम देर से शुरू हुआ, क्योंकि चीन से टीबीएम इसी मार्च में मिली। समुद्री टनल 30 महीने में बनने की उम्मीद है। फिर बीकेसी से विक्रोली (4.8 किमी) का रूट है। यह 20 माह में बनेगा। जबकि सावली से शीलफाटा तक की टनल 4.8 किमी बन चुकी है।


पानी का दबाव और कंपन रोकना बड़ी चुनौती

  • ऊपर आबादी, नीचे सुरंग: विक्रोली से बीकेसी के बीच इमारतों, फ्लाईओवरों को कंपन से बचाने के लिए टीबीएम की गति 4 आरपीएम पर सेट है। जमीन पर रियल-टाइम सेटलमेंट सेंसर 24 घंटे हलचलों की निगरानी कर रहे हैं।

  • पानी का दबाव: गीली मिट्टी और भारी जलदाब के कारण समुद्री सुरंग में पानी भरने का जोखिम है। इससे बचने 'स्लरी बेस्ड मिक्स शील्ड टीबीएम' चल रही है, जो मिट्टी-पानी के गाढ़े घोल की मदद से खुदाई कर रही है।

  • ढहने का डर: 13.6 मीटर व्यास वाली विशाल सुरंग एनएटीएम तकनीक से खोदते तो इसके ढहने की आशंका ज्यादा थी। इसलिए 'टीबीएम' से खुदाई के साथ ही कंक्रीट रिंग सेगमेंट्स और वाटरप्रूफ सीलिंग लगा रहे हैं।