देहरादून, उत्तराखंड के पहाड़ों से निकलकर मायानगरी मुंबई तक पहुंचने का सफर आसान नहीं होता। इसके लिए प्रतिभा के साथ संघर्ष, मेहनत और अपने किरदारों को जीने का हुनर भी जरूरी है।

पौड़ी जिले के लैंसडाउन तहसील के बौंठ गांव से ताल्लुक रखने वाले अभिनेता सुशील बौंठियाल ने इसी सफर में अपनी अलग पहचान बनाई है।

रंगमंच से अभिनय की शुरुआत करने वाले सुशील ने नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (एनएसडी) से प्रशिक्षण लिया और इसके बाद फिल्मों व टेलीविजन की दुनिया में कदम रखा। अब वह हालिया वेब सीरीज ‘दुनिया की ठांए-ठांए’ में मुख्य भूमिका में नजर आ रहे हैं।

इस सीरीज में उन्होंने एक ऐसे पिता का किरदार निभाया है, जो आर्थिक तंगी के बावजूद अपने बेटे के सपनों को पूरा करने के लिए अपना सब कुछ दांव पर लगा देता है।

कभी कंचा खेलने में माहिर रहा यह पिता अपने बेटे को शूटिंग की ट्रेनिंग दिलाता है। बेटे के मेडल के सपने को पूरा करने के लिए वह अपना सामान तक बेच देता है और घर में एक खाली फ्रेम रखता है, ताकि बेटे की उपलब्धि को उसमें सजा सके।

सुशील के मुताबिक, यह किरदार उनके लिए चुनौतीपूर्ण रहा, क्योंकि इसमें एक पिता के संघर्ष, त्याग और उम्मीदों को अलग अंदाज में पर्दे पर उतारना था।

सुशील का उत्तराखंड से रिश्ता सिर्फ जन्मभूमि तक सीमित नहीं है। उनके नाम के साथ जुड़ा ‘बौंठियाल’ उपनाम भी उनके पैतृक गांव की पहचान से आया है। पांचवीं तक गांव में सरकारी स्कूल में पढ़ाई करने के बाद वह परिवार के साथ लखनऊ चले गए।

वहां पढ़ाई, थिएटर और एनएसडी के सफर ने उन्हें अभिनय की दुनिया के लिए तैयार किया। ‘फुलवा’ सीरियल में जन्नत के पिता की भूमिका से लेकर ‘कागज’, ‘गुलाब गैंग’, ‘बिल्लू बार्बर’ और ‘सेल्फी’ जैसी फिल्मों तक उन्होंने अलग-अलग किरदार निभाए हैं।