चीन ने भारत के जिस इलाके पर 1959 में किया कब्जा, अब बना रहा सड़क और मिलिट्री ढांचा, सैटेलाइट तस्वीरों से खुलासा

Updated on 02-07-2026 12:27 PM
बीजिंग: हाल में आई सैटेलाइट तस्वीरों से भारतीय सीमा के पास चीन की नापाक हरकतों के बारे में पता चलता है। सैटेलाइट तस्वीरों में सामने आया है कि अरुणाचल प्रदेश से सटे तिब्बत-भारत सीमा के एक हिस्से पर चीन की नई सड़क का निर्माण कर रहा है। यह इलाका मैकमोहन रेखा के भीतर आता है, जो आधिकारिक नक्शों में दिखाई गई भारत की ऐतिहासिक सीमा है। हालांकि, इस इलाके में भारत और चीन की सोच में काफी अंतर है।

चीन के भारतीय क्षेत्र में कब्जा करने का मुद्दा हाल में चर्चा में आया, जब अरुणाचल प्रदेश के आदिवासी समूह ने दावा किया कि चीनी सेना ने भारत की सीमा के अंदर सड़कें और मिलिट्री कैंप बनाए हैं। बाद में भारतीय सेना ने इन दावों को खारिज कर दिया और कहा कि चीनी घुसपैठ की रिपोर्ट गलत है।

चीन कब्जे वाले इलाके में बना रहा सड़क

हालांकि, सैटेलाइट तस्वीरों के अध्ययन से पता चलता है कि चीन ने LAC के उस पार निर्माण किया है। भारत का इस इलाके पर ऐतिहासिक दावा है। दरअसल, भारत और चीन के बीच सीमा का निर्धारण मैकमोहन रेखा के जरिए होता रहा है, लेकिन पहले 1959 और फिर 1962 में भारत ने अपने कुछ इलाके चीन के हाथों गंवा दिए। चीन मैकमोहन रेखा के आगे बढ़कर बैठ गया जिसे वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) कहा गया।

भारत ने कभी नहीं छोड़ा दावा

हालांकि, भारत ने उस इलाके पर अपना दावा कभी नहीं छोड़ा, लेकिन दोनों देशों की सेनाएं वर्तमान में वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी LAC पर ही गश्त करती हैं और सुरक्षा करती हैं। सूत्रों का कहना है कि चीन का हालिया निर्माण वास्तविक नियंत्रण रेखा के उस पार है।

चीन तेजी से बना रहा ढांचा

साल 2021 में इसी इलाके में चीन के एक गांव के बारे में पता चला था, जिसमें 50 घर थे। इस बस्ती को अब एक नई सड़क के जरिए 9.42 किलोमीटर दूर बनाए गए एक नए गांव से जोड़ा गया है। इस बस्ती का ज्यादातर हिस्सा चीन के ऐसे इलाके में है, जिस पर कोई विवाद नहीं है। लेकिन एक कंस्ट्रक्शन प्लांट और दो हेलीपैड भारत के मूल दावे वाले इलाके (मैकमोहन रेखा के अंदर) दिखते हैं।अरुणाचल प्रदेश के हिस्सों में चीन की घुसपैठ को लेकर चिंताएं नई नहीं हैं। नवम्बर 2019 में बीजेपी सांसद तापिर गाओ ने लोकसभा में कहा था कि अरुणाचल प्रदेश में चीन के कब्जे की कोई कवरेज नहीं हो रही है। डोकलाम में गतिरोध का जिक्र करते हुए गाओ ने चेतावनी दी थी कि अगर डोकलाम जैसी कोई घटना होती है, तो वह अरुणाचल प्रदेश में होगी। साल 2017 में डोकमाल में भारत और चीन के बीच कई महीनों तक गतिरोध रहा था।

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