17 अगस्त 2026, भोपाल। मध्यप्रदेश शासन, संस्कृति विभाग अंतर्गत श्रीकृष्ण पाथेय न्यास द्वारा संचालित भगवान श्रीकृष्ण मेधावी छात्रवृत्ति ऑनलाइन प्रतियोगिता में छात्र-छात्रा एवं युवा बढ़-चढ़ कर भाग ले रहे है। आँकड़ों के अनुसार, क्विज़ प्लेटफ़ॉर्म की वेबसाइट पर अब तक 71,867 से अधिक विज़िट दर्ज की गई हैं। वहीं, कुल 5,084 प्रतिभागियों ने पंजीयन कराया है।
पंजीयन के लिंगवार आँकड़ों के अनुसार 2,808 पुरुष, 2,252 महिलाएँ और 24 अन्य श्रेणी के प्रतिभागियों ने पंजीयन कराया है। गौरतलब है कि माननीय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की प्रेरणा एवं मार्गदर्शन में संस्कृति विभाग अंतर्गत भगवान श्रीकृष्ण मेधावी छात्रवृत्ति योजना आरंभ की गयी है। जो भगवान श्रीकृष्ण द्वारा अर्जित 14 विद्याओं, 64 कलाओं, महर्षि सांदीपनि तथा भारतीय ज्ञान परम्परा पर आधारित है। योजना अंतर्गत 102 मेधावी छात्र-छात्राओं को ₹1,00,000 की एकमुश्त छात्रवृत्ति प्रदान की जाएगी।
माननीय मुख्यमंत्रीजी के संस्कृति सलाहकार एवं श्रीकृष्ण पाथेय न्यास के मुख्य कार्यपालक अधिकारी श्रीराम तिवारी ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण मेधावी छात्रवृत्ति ऑनलाइन प्रतियोगिता के माध्यम से नई पीढ़ी को भगवान श्रीकृष्ण के जीवन, उनके व्यक्तित्व, भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृति, शिक्षा और जीवन-मूल्यों से परिचित कराने का प्रयास किया गया है।
उन्होंने बताया कि डिजिटल माध्यम आज के विद्यार्थियों तक पहुँचने का प्रभावी साधन है। इसी को ध्यान में रखते हुए क्विज़ को रोचक और ज्ञानवर्धक स्वरूप दिया गया। श्रीकृष्ण पाथेय न्यास की वेबसाइट www.shrikrishnapatheynyas.com पर 71 हजार से अधिक विज़िट, 5 हजार से अधिक पंजीयन और 4 हजार से अधिक क्विज़ प्रयास इस बात का प्रमाण हैं कि विद्यार्थियों में भारतीय संस्कृति और श्रीकृष्ण के जीवन-दर्शन को जानने की गहरी रुचि है।न्यास के मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने कहा कि शैक्षणिक श्रेणी के अनुसार 3,498 पंजीयन विद्यालय स्तर के तथा 1,586 पंजीयन महाविद्यालय स्तर के विद्यार्थियों के हैं। विद्यालय स्तर पर कक्षा 9 के 598, कक्षा 10 के 724, कक्षा 11 के 902 और कक्षा 12 के 1,192 विद्यार्थियों ने पंजीयन कराया है। इसके अतिरिक्त पॉलिटेक्निक अथवा ITI स्तर के 82 विद्यार्थियों का पंजीयन हुआ है। इस प्रतियोगिता को युवाओं और विद्यार्थियों के बीच ले जाकर व्यापक प्रचार-प्रसार किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि प्रतियोगिता को विद्यार्थियों और युवाओं तक अधिक से अधिक पहुँचाने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा। विद्यालयों, महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों तथा डिजिटल माध्यमों के जरिए प्रतिभागियों को जोड़ने का अभियान चलाया जाएगा। हमारा उद्देश्य अधिकाधिक युवाओं को भगवान श्रीकृष्ण के जीवन-दर्शन, भारतीय ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना है।
प्रतियोगिता में सहभागिता के लिए श्रीकृष्ण पाथेय न्यास की वेबसाइट www.shrikrishnapatheynyas.com पर विजिट कर पंजीयन कर सकते है। प्रतियोगिता की अंतिम तिथि 30 सितंबर 2026 निर्धारित की गई है। योजना के अंतर्गत विजेताओं का चयन लॉटरी के माध्यम से किया जाएगा।
श्रीकृष्ण पाथेय न्यास की इस पहल के माध्यम से आधुनिक शिक्षा के साथ भारतीय ज्ञान, संस्कृति और परंपरा के प्रति विद्यार्थियों में रुचि विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है। छात्रवृत्ति का वितरण 1 नवंबर 2026, मध्यप्रदेश स्थापना दिवस के अवसर पर किया जाएगा।
श्रीकृष्ण पाथेय न्यास
राष्ट्र में नव जागरण तथा उत्कर्ष के लिये भारत वर्ष और विश्व के पथ प्रदर्शक, युगावतार भगवान श्रीकृष्ण द्वारा उज्जैन, मध्यप्रदेश को केन्द्र में रख कर की गई यात्रा के विभिन्न स्थलों के पुरान्वेषण तथा उन्हें तीर्थ के रुप में विकसित करने तथा सम्बन्धित क्षेत्रों के साहित्य, संस्कृति का संरक्षण, संवर्धन करने के उद्देश्य से माननीय मुख्यमंत्रीजी की अध्यक्षता एवं माननीय संस्कृति मंत्रीजी की उपाध्यक्षता में मध्यप्रदेश शासन, संस्कृति विभाग द्वारा श्रीकृष्ण पाथेय न्यास की स्थापना की गयी।
न्यास के उद्देश्य
मध्यप्रदेश में भगवान श्रीकृष्ण की यात्राओं से जुड़े स्थलों की पहचान, विकास, संरक्षण तथा उनका अभिलेखन, फ़ोटोग्राफ़ी, फ़िल्मांकन एवं चित्रांकन।
इन स्थलों के मंदिरों, जल संरचनाओं, वन संपदा एवं उद्यानों का संरक्षण तथा राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रचार।
उज्जैन में 14 विद्याओं एवं 64 कलाओं की औपचारिक शिक्षा हेतु सांदीपनि गुरुकुल की स्थापना।
सभागार, सामुदायिक भवन तथा धर्मशालाओं का निर्माण एवं संचालन।
शिक्षा, संस्कृति, कृषि तथा गौ एवं पशुधन पालन की विरासत का विकास।
नई पीढ़ी को भगवान श्रीकृष्ण की कथा एवं यात्रा स्थलों से भावनात्मक तथा अनुभवात्मक रूप से जोड़ना।
पर्यटकों, शोधार्थियों, युवाओं एवं विद्यार्थियों के लिए पुस्तकालय, संग्रहालय तथा सूचना केंद्रों की स्थापना।
उन ऋषियों, संतों, विचारकों, कवियों, लेखकों, कलाकारों एवं वैज्ञानिकों के योगदान का अभिलेखन जिन्होंने श्रीकृष्ण को जगद्गुरु के रूप में स्थापित किया।