भारत-ईयू ट्रेड डील में पाकिस्तान के दोस्त तुर्की को बड़ा झटका, नहीं मिलेगी कोई छूट

Updated on 29-01-2026 01:37 PM
नई दिल्ली: भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच एक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) हुआ है। इसका मतलब है कि भारत से सामान यूरोप जा सकता है और उस पर कम टैक्स लगेगा। लेकिन, पाकिस्तान के दोस्त तुर्की (Turkiye) के लिए यह नियम थोड़ा अलग है। तुर्की के सामान सीधे भारत नहीं आ सकते और इस एफटीए का फायदा नहीं उठा सकते।

यह सब तुर्की और ईयू के बीच एक कस्टम यूनियन की वजह से है। यह यूनियन 1996 से चल रही है। इसके तहत तुर्की को ईयू के बाहरी टैरिफ को मानना पड़ता है। यानी, अगर ईयू किसी देश के साथ एफटीए करता है और वहां के लिए टैक्स कम करता है, तो तुर्की को भी वही छूट भारत को देनी होगी।

तुर्की को नहीं मिलेगा फायदा

इकनॉमिक टाइम्स के अनुसार एक अधिकारी ने बताया कि भारतीय सामान ईयू में जाते हैं और फिर वे किसी भी ऐसे देश में जा सकते हैं जिसके साथ ईयू की कस्टम यूनियन है। लेकिन तुर्की को इसका फायदा नहीं मिलेगा क्योंकि वह एफटीए में ईयू के हिस्से के तौर पर नहीं है। इसलिए, तुर्की भारत को निर्यात नहीं कर सकता और रियायतों का लाभ नहीं उठा सकता।
यह कस्टम यूनियन सिर्फ सामानों के लिए है। इसमें खेती के कच्चे माल, सेवाएं, निवेश, सरकारी खरीद और डिजिटल व्यापार शामिल नहीं हैं। भारत-ईयू एफटीए के तहत, 96.8% सामानों पर तरजीही बाजार पहुंच मिलेगी। इसका मतलब है कि भारत के 99.5% निर्यात (वॉल्यूम के हिसाब से) और 90.7% निर्यात (वैल्यू के हिसाब से) ईयू में बिना टैक्स के जाएंगे।

भारत-यूरोप के बीच समझौता

ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव के को-फाउंडर अजय श्रीवास्तव ने बताया कि तुर्की का सामान भारत-ईयू एफटीए का उपयोग करके भारत में ड्यूटी-फ्री प्रवेश नहीं कर सकता, भले ही वे ईयू बंदरगाहों से भेजे जाएं। वे मूल रूप से तुर्की के माने जाएंगे और इसलिए भारत के एफटीए के मूल नियमों को पूरा नहीं करेंगे। ये नियम ईयू के साथ हस्ताक्षरित है, न कि तुर्की के साथ।

तुर्की ने दिया था पाकिस्तान का साथ

ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारत ने पिछले साल मई में पाकिस्तान में आतंकवादी ठिकानों पर कार्रवाई की थी। तुर्की ने हाल ही में पाकिस्तान का समर्थन किया था और ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान में आतंकवादी ठिकानों पर भारत की कार्रवाई की निंदा की थी। उसके बाद भारत और तुर्की के बीच तनावपूर्ण संबंध हो गए।

व्यापार के आंकड़ों से पता चलता है कि 2024-25 में भारत का तुर्की को निर्यात पिछले वित्तीय वर्ष के 6.65 अरब डॉलर से घटकर 5.71 अरब डॉलर हो गया। वहीं, तुर्की से आयात 20.8% घटकर लगभग 3 अरब डॉलर रह गया। 2023-24 में भारत के कुल 437 अरब डॉलर के निर्यात में तुर्की की हिस्सेदारी लगभग 1.3% थी।

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