तुर्की करा पाएगा पाकिस्तान-तालिबान में शांति?
तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के हमलों ने पाकिस्तान और तालिबान के बीच के झगड़े को और बढ़ाया ही है। जिसमें बार-बार हुए संघर्ष-विराम समझौते टूटे हैं और लड़ाई तेजी से शहरी इलाकों की ओर फैल रही है। बेकाबू संघर्ष से पैदा होने वाले क्षेत्रीय खतरे को समझते हुए तुर्की और कतर ने अपनी कूटनीतिक पहल को फिर से तेज कर दिया है। बेलारूस में हुई शुरुआती बातचीत के बाद इस प्रक्रिया में तेजी आई है।न्यूज 18 ने खुफिया सूत्रों के हवाले से बताया है कि इस नई मध्यस्थता रणनीति का मुख्य हिस्सा कंधार में होने वाली एक अहम बैठक हो सकती है जिसमें तुर्की के खुफिया प्रमुख इब्राहिम कालिन और कतरी अधिकारी अल-कुबैसी सीधे तालिबान के सर्वोच्च नेता से मिल सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो यह तालिबान के अमीर और विदेशी प्रतिनिधियों के बीच सत्ता संभालने के बाद से अब तक की दूसरी ऐसी ज्ञात बैठक होगी।
इस्लामाबाद में अहम पक्षों के साथ-साथ तालिबान के शीर्ष नेतृत्व से सीधे बातचीत करके, तुर्की-कतरी गठबंधन का मकसद सीमा सुरक्षा पर पक्के समझौते करना, सीमा पार से होने वाली उग्रवादी गतिविधियों को रोकना और लंबे समय तक स्थिरता लाने के लिए एक व्यावहारिक रास्ता तैयार करना है।
