नई दिल्ली: दिवाली आने वाली है। इस समय टीवी और स्मार्टफोन पर आपको पेंट कंपनियों के विज्ञापन खूब देखने को मिलेंगे। जब भी आप किसी पेंट कंपनी के विज्ञापन की लाइन- हर घर कुछ कहता है... सुनेंगे, आपके दिमाग में तुरंत एक कंपनी का नाम आएगा। एशियन पेंट्स। यह वह कंपनी है जिसका नाम भारत के लगभग हर शहर और कस्बे में आपको आसानी से सुनने को मिल जाएगा।घर की दीवारों से लेकर बड़े कमर्शियल प्रोजेक्ट्स तक, पेंट के बाजार में इस कंपनी की मजबूत पहचान है। लेकिन एशियन पेंट्स हमेशा से इतनी बड़ी कंपनी नहीं थी। इसकी शुरुआत 1942 में मुंबई के एक छोटे से गैराज से हुई थी। आज कंपनी ने मजबूत ब्रांड, विशाल डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क, टेक्नोलॉजी और ग्राहकों के भरोसे के दम पर भारतीय पेंट बाजार में अपनी अलग पहचान बनाई है।चार दोस्तों ने शुरू की कंपनी
एशियन पेंट्स की शुरुआत साल 1942 में चार दोस्तों चंपकलाल चोकसी, चिमनलाल चोकसी, सूर्यकांत दानी और अरविंद वकील ने की थी। उस समय भारत के पेंट बाजार पर विदेशी कंपनियों का दबदबा था। इन चारों ने सीमित संसाधनों के बावजूद भारतीय ग्राहकों को ध्यान में रखकर कारोबार शुरू किया।
कंपनी की शुरुआती यात्रा आसान नहीं थी। द्वितीय विश्व युद्ध और भारत छोड़ो आंदोलन के दौर में कई तरह की कारोबारी मुश्किलें सामने आईं। इसके बावजूद कंपनी ने अपना काम जारी रखा और धीरे-धीरे भारतीय बाजार में अपनी जगह बनानी शुरू की।भारतीय ग्राहकों पर फोकस
एशियन पेंट्स ने शुरुआत से ही भारतीय ग्राहकों की जरूरतों को समझने पर जोर दिया। कंपनी ने ऐसे प्रोडक्ट तैयार करने की कोशिश की जो भारतीय मौसम, घरों और ग्राहकों की कीमत संबंधी जरूरतों के अनुरूप हों। यही रणनीति आगे चलकर कंपनी की बड़ी ताकत बनी। जहां दूसरी कंपनियां केवल पेंट बेचने पर ध्यान दे रही थीं, वहीं एशियन पेंट्स ने ग्राहक, डीलर और पेंटर तीनों के साथ मजबूत संबंध बनाने पर काम किया।
डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क बना बड़ी ताकत
एशियन पेंट्स की सफलता में उसके डीलर नेटवर्क की बड़ी भूमिका रही है। कंपनी ने दशकों में देशभर में एक विशाल डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम तैयार किया। आज कंपनी का नेटवर्क 70,000 से ज्यादा डीलर्स तक पहुंचता है।इसका फायदा यह हुआ कि छोटे शहरों और कस्बों तक भी कंपनी के प्रोडक्ट आसानी से उपलब्ध होने लगे। किसी ग्राहक को पेंट खरीदने के लिए बहुत दूर जाने की जरूरत नहीं पड़ी। मजबूत सप्लाई चेन ने कंपनी को बाजार में लगातार उपलब्धता बनाए रखने में मदद की। बाद में कंपनी ने टेक्नोलॉजी को बिजनेस की ताकत बनाया।
1950 के दशक में आया बड़ा प्रोडक्ट
कंपनी ने 1950 के दशक में Washable Distemper लॉन्च किया। इसका उद्देश्य सस्ते ड्राई डिस्टेंपर और महंगे प्लास्टिक डिस्टेंपर के बीच एक ऐसा विकल्प देना था, जिसे आम ग्राहक भी खरीद सके।समय के साथ कंपनी ने अपनी मार्केटिंग रणनीति पर भी काफी ध्यान दिया। 'हर घर कुछ कहता है' जैसी कैंपेन लाइन ने घर और पेंट के बीच भावनात्मक जुड़ाव बनाने में कंपनी की मदद की और यह लंबे समय तक लोगों के बीच लोकप्रिय रही।
समय के साथ एशियन पेंट्स ने यह समझा कि ग्राहक सिर्फ दीवारों पर लगाने वाला पेंट नहीं खरीदता, बल्कि वह अपने घर को बेहतर बनाने के लिए खर्च करता है। बाद में कंपनी का कारोबार केवल पेंट बेचने तक सीमित नहीं रहा और उसे घर से जुड़े दूसरे सेगमेंट में भी विस्तार का मौका मिला।
पेंटर और डीलर बने अहम साझेदार
पेंट कारोबार में पेंटर और डीलर का ग्राहक के खरीद फैसले पर बड़ा प्रभाव होता है। एशियन पेंट्स ने इसी वजह से इन दोनों समूहों के साथ लंबे समय तक संबंध बनाने पर जोर दिया।
कंपनी ने पेंटर ट्रेनिंग, डीलर सपोर्ट और आफ्टर-सेल्स सर्विस जैसी गतिविधियों के जरिए अपने नेटवर्क को मजबूत किया। जब किसी ब्रांड पर पेंटर और डीलर का भरोसा बनता है, तो ग्राहक तक उस ब्रांड की पहुंच और मजबूत हो जाती है।
गैरेज से शुरू होकर ग्लोबल कारोबार तक
एक छोटे गैराज से शुरू हुई यह कंपनी आज भारत की सबसे बड़ी डेकोरेटिव पेंट कंपनियों में शामिल है। कंपनी की भारत के अलावा कई अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी मौजूदगी है। कंपनी आज भारतीय शेयर बाजार में लिस्टेड है। इसका मार्केट कैप 2,30,073 करोड़ रुपये है।
वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू करीब 35,583 करोड़ रुपये रहा। इसमें पिछले साल के मुकाबले 5 फीसदी से ज्यादा की तेजी आई। वहीं कंपनी का नेट प्रॉफिट करीब 18 फीसदी उछलकर करीब 4,325 करोड़ रुपये रहा।