चीन का बांग्लादेश और म्यांमार में CPEC जैसा प्लान, अब नार्थ ईस्‍ट में भारत को घेरने की तैयारी, बढ़ेगी टेंशन

Updated on 02-07-2026 12:22 PM
बीजिंग: भारत के पूर्वी बॉर्डर के आसपास पकड़ बनाने के लिए चीन एक अहम प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है। अरबों डॉलर के चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) की तरह बीजिंग का प्लान अब म्यांमार के रास्ते चीन को बांग्लादेश से जोड़ने वाला गलियारा बनाने का है। दक्षिण एशिया में अपने महत्वाकांक्षी कनेक्टिविटी प्लान के तहत चीन अरब सागर तक पहुंच बनाने के बाद बंगाल की खाड़ी तक जाने वाले रास्ते पर नजर जमाए हुए है।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ने ट्रांसनेशनल इकोनॉमिक कॉरिडोर का प्रस्ताव बांग्लादेशी प्रधानमंत्री तारिक रहमान की हालिया बीजिंग यात्रा के दौरान उनके सामने रखा है, जिस पर ढाका भी उत्साहित दिख रहा है। प्रस्ताव इसमें शामिल देशों के लिए बेहतर कनेक्टिविटी, व्यापार और मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट का वादा करता है।

बांग्लादेश देगा चीन का साथ!

चीन के प्रस्ताव को ढाका की हरी झंडी मिली है। बांग्लादेशी अधिकारियों का कहना है कि प्रस्तावित कॉरिडोर से व्यापार को बढ़ावा मिलेगा। ढाका के बंदरगाहों का आधुनिकीकरण होगा और चीनी बाजारों तक पहुंच बेहतर करने में मदद मिलेगी। भारत बॉर्डर के पास पाकिस्तान में बीजिंग का CPEC है, जो पश्चिमी चीन को बलूचिस्तान से जोड़ता है। इसी तरह का कुछ रूट अब वह भारत के पूर्वी बॉर्डर पर चाहता है।

CPEC पर भारत विरोध जताता रहा है क्योंकि यह कॉरिडोर गिलगित-बाल्टिस्तान से होकर गुजरता है। इस इलाके पर पाकिस्तान का अवैध कब्जा है। प्रस्तावित चीन-म्यांमार-बांग्लादेश कॉरिडोर को म्यांमार से होकर गुजरेगा। इसमें CPEC की तरह भारत की संप्रभुता के उल्लंघन जैसा मामला नहीं है लेकिन नई दिल्ली के लिए यह प्रस्ताव बारीकी से ध्यान देने लायक है।

क्या है चीन का प्रस्ताव

प्रस्तावित कॉरिडोर बंगाल की खाड़ी और उसके आसपास अपनी रणनीतिक मौजूदगी बढ़ाने की बीजिंग की कोशिशों को दर्शाता है। चीन-म्यांमार-बांग्लादेश कॉरिडोर का यह चीनी प्रस्ताव, मूल बांग्लादेश-चीन-भारत-म्यांमार (BCIM) कॉरिडोर के ठप होने के कई साल बाद आया है। BCIM इकोनॉमिक कॉरिडोर में चीन, भारत, बांग्लादेश और म्यांमार को जोड़ने वाले सड़क, रेल और ट्रांसपोर्ट लिंक की योजना थी।

यह प्रस्ताव प्रभावी रूप से चीन के युन्नान प्रांत को म्यांमार के जरिए बांग्लादेश से जोड़ने के विचार को फिर से जीवित करता है। इस दफा इसमें भारत शामिल नहीं है। ताजा प्रस्ताव तीन देशों का एक वैकल्पिक रास्ता है। यह बंगाल की खाड़ी तक अपनी पहुंच बेहतर बनाने की बीजिंग की कोशिश है। इसे रणनीतिक रूप से अहम मलक्का जलडमरूमध्य से बचने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा सकता है।

चीनी कॉरिडोर में मौका देख रहा ढाका

ढाका में चीनी कॉरिडोर को एक आर्थिक पहल के तौर पर पेश किया जा रहा है। बांग्लादेश के अखबार द डेली स्टार ने बताया है कि प्रस्तावित रास्ता चीन के युन्नान प्रांत के कुनमिंग से शुरू होगा, म्यांमार के मांडले से गुजरेगा और फिर यांगून और क्याुकफ्यू की ओर बंटेगा। आखिर में सड़क और रेल मार्गों के जरिए बांग्लादेश के चट्टोग्राम और कॉक्स बाजार से जुड़ेगा।

बांग्लादेशी मीडिया और एक्सपर्ट कह रहे हैं कि यह प्रस्तावित कॉरिडोर जमीन पर उतरता है तो सड़कों, रेलमार्गों, बंदरगाहों और स्पेशल इकोनॉमिक जोन में चीनी निवेश को बढ़ावा देगा। बांग्लादेश की चीनी और दक्षिण-पूर्व एशियाई बाजारों तक पहुंच बेहतर होगी, जिससे देश की आर्थिक स्थिति में तेज उछाल आ सकता है।

कॉरिडोर में रुकावट बनेगा म्यांमार!

बांग्लादेश और चीन को इस कॉरिडोर से काफी उम्मीदे हैं लेकिन म्यांमार से इसका गुजरना आसान नहीं होगा। प्रस्तावित रास्ते का ज्यादादातर हिस्सा म्यांमार के संघर्ष वाले इलाकों से होकर गुज़रता है। इसके पूर्वी रखाइन राज्य में क्योकफ्यू डीप-सी पोर्ट है, वहां जबरदस्त लड़ाई चल रही है। म्यांमार की जुंटा सेना का इस इलाके के कई हिस्सों से कंट्रोल कमजोर हुआ है।
बांग्लादेश को चीन से जोड़ने वाली सड़कें और रेलवे लाइनें बनने से पहले, म्यांमार से होकर गुजरने वाला एक चालू कॉरिडोर होना जरूरी है। फिलहाल म्यांमार की सुरक्षा की स्थिति को देखते हुए इसकी कोई गारंटी नहीं है। चीन और बांग्लादेश को इस कॉरिडोर के लिए म्यामांर को साधना होगा, जहां कई वर्षों से गृहयुद्ध जारी है।

भारत के लिए कॉरिडोर का अर्थ?

भारत के नजरिए से देखें तो चीन का यह प्रस्ताव उसके लंबे समय के रणनीतिक इरादों को दिखाता है। चीन ने CPEC में भारी निवेश करते हुए पाकिस्तान के जरिए अरब सागर तक पहुच बनाई है। म्यांमार और बांग्लादेश से होकर गुजरने वाला एक सफल कॉरिडोर बंगाल की खाड़ी के आसपास बंदरगाहों, इंडस्ट्रियल जोन और ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए बीजिंग को मजबूत करेगा।

इस नए कॉरिडोर सेचीन को हिंद महासागर के बड़े इलाके तक भी काफी हद तक पहुंच मिल जाएगी। चीन-म्यांमार-बांग्लादेश इकोनॉमिक कॉरिडोर फिलहाल कागजों पर है लेकिन यह प्रस्ताव दिखाता है कि बीजिंग दक्षिण एशिया और हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी आर्थिक और रणनीतिक पहुंच को मजबूत करने में लगातार लगा हुआ है।

अन्य महत्वपुर्ण खबरें

 27 August 2026
 नेपाल में आई प्राकृतिक आपदा के बीच बड़ी संख्या में मध्यप्रदेश के नागरिक भी फंसे हो सकते हैं, इसे लेकर एमपी में भी टेंशन बढ़ गया है। राज्य सरकार ने…
 19 August 2026
दम्माम: भारत के 80वां स्वतंत्रता दिवस दिवस का जश्न सऊदी अरब में धूमधाम से मनाया गया है। इस मौके पर इंडियन ओवरसीज फोरम (IOF) ने लुलु मॉल के साथ मिलकर…
 19 August 2026
पेरिस: फ्रांस राफेल लड़ाकू विमान के F5 वैरिएंट को एक बहुत ज्यादा अपग्रेड किए गए 4.5-जेनरेशन फाइटर के तौर पर विकसित कर रहा है। यह एक नेटवर्क वाले 'फ्लाइंग कमांड…
 19 August 2026
काठमांडू: भारत और नेपाल के गृह मंत्रालय के सीनियर अधिकारी गुरुवार और शुक्रवार को देहरादून में बॉर्डर मैनेजमेंट और दोनों देशों के बीच सुरक्षा से जुड़े कई मुद्दों पर बातचीत…
 19 August 2026
लंदन: ब्रिटेन के पूर्व कैबिनेट मंत्री सर विंस केबल ने भारत की जमकर तारीफ करते हुए उसे एक स्विंग कंट्री कहा है। उन्होंने कहा कि भारत उन देशों में सबसे…
 19 August 2026
वॉशिंगटन: चीन के बढ़ते खतरे के बीच अब अमेरिकी सेना भी यूक्रेन युद्ध से सबक लेते हुए दक्षिण कोरिया से K9 मोबाइल तोप लेने जा रही है। अमेरिकी सेना एक…
 10 August 2026
ढाका: भारत के उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी ने बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान से सोमवार को मुलाकात की है। बांग्लादेश का उच्चायुक्त नियुक्त होने के बाद त्रिवेदी की बांग्लादेश के प्रधानमंत्री…
 10 August 2026
तेल अवीव: सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के बीच हुए 'मक्का समझौते' के बाद इजरायल का मानना है कि इस समझौते के बाद उसके भारत से संबंध और मजबूत होंगे।…
 10 August 2026
ढाका: बांग्लादेश में हो रहे अहम घटनाक्रम के बीच भारत के चार सुरक्षा अधिकारियों का एक प्रतिनिधिमंडल ढाका पहुंचा है। भारतीय प्रतिनिधिमंडल बांग्लादेशी सेना की खुफिया एजेंसी डॉयरेक्टरेट जनरल ऑफ…
Advt.