राजस्थान सरकार ने आईपीएस अफसरों के सेंट्रल डेपुटेशन (केंद्र में प्रतिनियुक्ति) पर रोक लगा दी है। दिनेश एमएन और पूर्व जयपुर पुलिस कमिश्नर बीजू जॉर्ज जोसेफ समेत 5 IPS अफसर फिलहाल सेंट्रल डेपुटेशन पर नहीं जा पाएंगे।
आईएएस-आईपीएस अफसरों के ट्रांसफर-पोस्टिंग से जुड़े कार्मिक विभाग का कहना है कि केंद्र सरकार किसी अफसर को बुलाने के लिए विशेष आग्रह करती है तो ही अनुमति दी जाएगी। फिलहाल केंद्र सरकार ने ऐसा आग्रह नहीं किया है।
आपको बता दें अभी राजस्थान कैडर के 26 IPS अफसर पहले ही सेंटर में डेपुटेशन पर चल रहे हैं। ऐसे में राज्य सरकार का तर्क है- कानून व्यवस्था के सुचारू संचालन के लिए वरिष्ठ और अनुभवी आईपीएस अफसरों की कमी है।
ब्यूरोक्रेसी से जुड़े सूत्रों की मानें तो मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) भी फिलहाल अफसरों को सेंट्रल डेपुटेशन पर भेजने के पक्ष में नहीं है।
नाम हुआ था मंजूर, लेकिन अनुमति नहीं
जयपुर के पूर्व पुलिस कमिश्नर रहे बीजू जॉर्ज जोसेफ सेंट्रल डेपुटेशन पर जाना चाहते हैं। लेकिन सरकार ने इन्हें अनुमति नहीं दी है।
जबकि जून 2026 में केंद्रीय मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति ने देशभर के 33 आईपीएस अधिकारियों के साथ राजस्थान कैडर के आईपीएस बीजू जॉर्ज जोसेफ का नाम डीजी रैंक के लिए मंजूर किया था।
एंपैनलमेंट होने के बाद भी बीजू जॉर्ज जोसेफ के वर्तमान में एडीजी (कार्मिक) के पद पर कार्यरत हैं।
दिनेश एमएन को भी परमिशन नहीं
इसी प्रकार एसीबी एडीजी रहे दिनेश एमएन भी सेंट्रल डेपुटेशन पर जाना चाहते हैं। लेकिन उन्हें भी अनुमति नहीं मिली है। फरवरी 2025 में आईपीएस दिनेश एमएन को भारत सरकार में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADG) या समकक्ष पदों पर प्रतिनियुक्ति के लिए एंपैनल किया था। वर्तमान में वे राजस्थान में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ATS, AGTF, ANTF) के पद पर कार्यरत हैं।
राजस्थान के 26 IPS हैं अभी डेपुटेशन पर
कार्मिक विभाग के अनुसार राजस्थान के 26 आईपीएस अधिकारी अभी केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर हैं। राजस्थान में IPS के कुल स्वीकृत पद 222 हैं। वर्तमान में लगभग 208 से 214 के आसपास अधिकारी कार्यरत हैं।
हालांकि, समय-समय पर पदोन्नति और नई नियुक्तियों के कारण यह संख्या बदलती रहती है। इस लिहाज से देखें तो करीब 20-22 आईपीएस अफसरों की कमी चल रही है।
कानूनी और प्रशासनिक तौर पर सेंट्रल डेपुटेशन के लिए अधिकारी की सहमति और संबंधित राज्य सरकार की एनओसी (मंजूरी) दोनों का होना आवश्यक होता है।
पहले भी सरकारें लगाती आई हैं रोक
प्रदेश में यह पहला मौका नहीं है कि राज्य सरकार ने अखिल भारतीय सेवा से अधिकारियों के सेंट्रल डेपुटेशन जाने पर रोक लगाई हो। इससे पहले भी 2019 में गहलोत सरकार ने भी आईएएस अफसरों के सेंट्रल डेपुटेशन जाने पर रोक लगा दी थी।
गहलोत सरकार से केंद्रीय कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग ने अफसरों की कमी को पूरा करने के लिए आईएएस अफसर सेंट्रल डेपुटेशन पर भेजने का अनुरोध किया था। गहलोत सरकार ने तर्क दिया कि प्रदेश में वरिष्ठ आईएएस अफसरों की कमी है।
वरिष्ठ पत्रकार महेश शर्मा का कहना है कि कई बार राज्य सरकारें अपने प्रशासनिक कार्यों या अधिकारियों की कमी का हवाला देकर अथवा राजनीतिक कारणों से अधिकारियों को एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) देने से इनकार कर देती हैं या उनके आवेदन रोक देती हैं।
कैसे होती है केंद्र सरकार में प्रतिनियुक्ति?
रिटायर्ड आईजी सत्यवीर सिंह बताते हैं राज्य में 9 साल काम करने के बाद केंद्र सरकार में प्रतिनियुक्ति संभव होती है। इसके बाद ही केंद्र में प्रतिनियुक्ति के लिए आवेदन कर सकते हैं।
अधिकतम 5 साल केंद्र सरकार में काम कर सकते हैं। वहीं कुछ मामलों में 2 साल का विस्तार मिल सकता है। फिर राज्य कैडर में वापस जाना पड़ता है।
केंद्र सरकार जिस भी अफसर को डेपुटेशन पर चाहती है वह अपने संबंधित कैडर से रिलीव हो जाएगा। भले ही संबंधित राज्य सरकार इससे असहमत हो या फिर निर्धारित समय सीमा में इस पर अपनी सहमति न दें।
केंद्र सरकार जरूरत पड़ने पर बुला सकती है?
एक्सपर्ट का कहना है कि IPS अधिकारियों का कैडर आवंटन केंद्रीय गृह मंत्रालय करता है। ऐसे में केंद्र सरकार जरूरत पड़ने पर किसी भी IPS अधिकारी को सेंट्रल डेप्यूटेशन यानी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर अपने पास बुला सकती है।
ऐसा एक निश्चित समय तक के लिए किया जा सकता है। बाद में वह अधिकारी अपने मूल कैडर में लौट जाता है। केंद्र सरकार एक सीमित समय के लिए किसी IPS अधिकारी को दूसरे राज्य में भी भेज सकती है।
राज्य सरकार की सहमति को महत्व, लेकिन अनिवार्य नहीं
इंडियन पुलिस सर्विस (कैडर) रूल्स, 1954 के नियम 6 के मुताबिक केंद्र सरकार, राज्य की सहमति से किसी IPS अधिकारी को प्रतिनियुक्ति पर बुला सकती है। यानी राज्य सरकार की सहमति को महत्व दिया गया है।
लेकिन यह अनिवार्य नहीं है। इसी नियम में यह लिखा गया है कि अगर राज्य सरकार केंद्र से सहमत न हो तब भी अंतिम फैसला केंद्र का ही होगा। राज्य सरकार को उसका पालन करना होगा।
अधिकारी बोले- प्रदेश में वरिष्ठ अफसरों की कमी
कार्मिक विभाग के संयुक्त सचिव धीरज कुमार सिंह का कहना है कि सेंट्रल डेपुटेशन भेजने या नहीं भेजने का निर्णय मुख्यमंत्री के स्तर पर ही होता है।
जिन अफसरों ने सेंट्रल डेपुटेशन पर जाने के लिए आवेदन किया था, उन्हें राज्य सरकार ने एनओसी नहीं दी। प्रदेश में वरिष्ठ और अनुभवी अफसरों की कमी है।