नई दिल्ली। क्या आपके साथ भी ऐसा हो रहा है कि पहले जिस डाइट या एक्सरसाइज से आपका वजन झट से कम हो जाता था, अब उसका शरीर पर कोई असर नहीं दिख रहा? अगर आप उम्र के उस पड़ाव पर हैं जहां मेनोपॉज करीब है या शुरू हो चुका है, तो परेशान मत होइए। आपके शरीर के नियम अब बदल रहे हैं।

इस उम्र में वजन कम करने के लिए सिर्फ वजन नापने वाली मशीन पर नजर रखना काफी नहीं है। हर साल 18 अक्टूबर को मनाए जाने वाले वर्ल्ड मेनोपॉज डे (World Menopause Day 2026) के मौके पर, आइए जानते हैं कि आपके शरीर में फैट और मसल मास का संतुलन कैसे बदल रहा है।


क्या कहती है रिसर्च?

इसे समझने के लिए साल 2026 की एक स्टडी पर नजर डालते हैं। इस रिसर्च में देखा गया कि जिन महिलाओं का BMI बिल्कुल सामान्य था, मेनोपॉज से पहले उनके शरीर में औसत फैट 24.8% था। हालांकि, मेनोपॉज के बाद बिना वजन बढ़े ही उनके शरीर का फैट प्रतिशत 28.8% तक पहुंच गया। यानी, बाहर से सब सामान्य दिखने पर भी शरीर के अंदर फैट जमा होने का तरीका बदल जाता है।


शरीर में आखिर क्या बदल रहा है?

पेरिमेनोपॉज और मेनोपॉज के समय महिलाओं के शरीर में हॉर्मोन्स तेजी से बदलते हैं। इसके साथ ही उम्र बढ़ने के कारण मांसपेशियां कम होने लगती हैं और नींद भी डिस्टर्ब रहने लगती है। इन सभी चीजों का सीधा असर शरीर के फैट स्टोर करने के तरीके पर पड़ता है। इसलिए, अब आपका लक्ष्य सिर्फ वजन घटाना नहीं होना चाहिए, बल्कि हड्डियों की मजबूती, मांसपेशियों को बचाए रखना और अपने मेटाबॉलिज्म को दुरुस्त रखना होना चाहिए।

डाइटिंग और वर्कआउट की सबसे बड़ी गलती

अक्सर वजन बढ़ता देख महिलाएं खाना-पीना बहुत कम कर देती हैं या फिर जिम में सिर्फ कार्डियो करने लगती हैं। यह एक बहुत बड़ी गलती है। खाना कम करने से शरीर को जरूरी पोषण नहीं मिल पाता। इसके बजाय अपनी डाइट में हरी सब्जियां, साबुत अनाज, हेल्दी फैट्स और भरपूर प्रोटीन शामिल करें। प्रोटीन आपकी मांसपेशियों को ताकत देगा और कैल्शियम से भरपूर खाना आपकी हड्डियों को कमजोर होने से बचाएगा।

कैसा हो आपका फिटनेस रूटीन?

दिल को सेहतमंद रखने के लिए वॉक करना, स्विमिंग या साइकिल चलाना बेहतरीन विकल्प हैं, लेकिन सिर्फ इतने से काम नहीं चलेगा। बढ़ती उम्र में मांसपेशियों को ढीला पड़ने से रोकने के लिए अपने रूटीन में 'स्ट्रेंथ ट्रेनिंग' को जरूर शामिल करें। कुछ दिनों तक बहुत भारी कसरत करने से ज्यादा फायदेमंद यह है कि आप ऐसा वर्कआउट चुनें जिसे आप बिना थके रोजाना कर सकें।

नींद और रूटीन का असर

मेनोपॉज के दौरान नींद टूटनी आम बात है, लेकिन इसकी वजह से दिनभर थकावट रहती है और फिटनेस रूटीन टूट जाता है। इसलिए, सोने का एक फिक्स समय तय करें। एक अच्छी और पूरी नींद आपके वजन को कंट्रोल करने में बहुत बड़ी भूमिका निभाती है।

क्या हर बार वजह मेनोपॉज ही है?

यह ध्यान रखना भी जरूरी है कि मिडलाइफ में वजन में आने वाले बदलावों की वजह हमेशा मेनोपॉज नहीं होती। कई बार बढ़ती उम्र, थायरॉइड की समस्या, किसी बीमारी या कुछ दवाइयों के असर से भी वजन बदल सकता है। अगर आपको शरीर में बिना किसी कारण के बदलाव महसूस हो रहे हैं, तो अपने डॉक्टर से सलाह लेने में देरी न करें।

बदलते शरीर को ऐसे करें स्वीकार

जवानी के दिनों वाली ट्रिक्स अब शायद काम न आएं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आप फिट नहीं रह सकतीं। बस जरूरत है अपने शरीर की नई जरूरतों को समझने की। एक बैलेंस्ड डाइट, सही एक्सरसाइज, अच्छी नींद और एक सस्टेनेबल रूटीन अपनाकर आप मेनोपॉज के सफर को भी पूरे कॉन्फिडेंस के साथ पार कर सकती हैं।