काठमांडू: नेपाल की छात्रा प्रकृति मल्ला की हैंडराइटिंग की खूब तारीफ हो रही है। उनकी हैंडराइटिंग ऐसी है, जैसे किसी ने कंप्यूटर से टाइप किया हो। हर कैरेक्टर अपनी जगह पर, शब्दों के बीच का स्पेस एकदम सटीक। उनकी हैंडराइटिंग बिलकुल ऐसी नहीं लगती कि किसी ने इसे पेन से लिखा है। यही कारण है कि प्रकृति मल्ला की लिखावट ने वर्ष 2016 से ही 14 साल की उम्र से दुनिया का ध्यान खींचा है। प्रकृति को उनकी खूबसूरत हैंडराइटिंग के लिए कई सम्मान भी मिल चुके हैं।
14 साल की उम्र में लिखावट ने खींचा ध्यान
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, प्रकृति मल्ला सिर्फ 14 साल की थी, जब उसकी हैंडराइटिंग ने दुनिया भर का ध्यान खींचा और वायरल हो गई। उस समय वह बीरेंद्र सैनिक आवासीय कॉलेज में ग्रेड 8 में पढ़ रही थी। उनकी यह कामयाबी इस बात की याद दिलाती है कि रोजाना की क्लासरूम स्किल उस स्कूल से कहीं ज्यादा ध्यान खींच सकती है जिसमें उसे डेवलप किया गया हो।
प्रकृति मल्ला लिखावट इतनी खास क्यों है?
प्रकृति मल्ला की लिखावट की खास बात है उसका एक जैसा होना। अलग-अलग अक्षर पूरे पेज पर एक जैसे दिखाई देते हैं। शब्दों के बीच की दूरी और वाक्यों का अलाइनमेंट काफी एक जैसा रहता है। हाथों से लिखावट में कैरेक्टर्स के बीच ऐसी गैपिंग रखना और सटीकता को बनाए रखना काफी मुश्किल होता है। उनकी लिखावट ऐसी लगती है, जैसे किसी ने टाइप किया हो। हर अक्षर सफाई और सटीकता के साथ कागज पर उकेरा नजर आता है।
दुनिया की सबसे सुंदर लिखावट का तमगा
2017 की एक रिपोर्ट में, स्टडी इंटरनेशनल ने बताया कि उनकी हैंडराइटिंग को ऑनलाइन काफी तारीफ मिली। सोशल मीडिया यूजर्स ने तो प्रकृति की लिखावट को डिजिटल फॉन्ट के रूप में अपनाने का सुझाव दिया था। उनकी हैंडराइटिंग को दुनिया की सबसे सुंदर लिखावट का तमगा दिया गया। मल्ला ने 2021 में यूनाइटेड अरब अमीरात के लीडरशिप और लोगों को देश के 51वें स्पिरिट ऑफ द यूनियन सेलिब्रेशन के लिए बधाई लेटर लिखा। इस चिट्ठी ने उनकी हैंडराइटिंग को पूरी दुनिया में प्रसिद्ध कर दिया।